बुधवार, 29 जुलाई 2009

(4) वो दिन हवा हुए ...

बचपन में कहावत सुना करते थे '' घर की मुर्गी दाल बराबर '' , जिसका मतलब था ' घर की बेहतरीन चीज़ को भी बाहर की चीज़ की तुलना में कमतर समझाना । सीधे शब्दों में मुर्गी के सामने दाल की कोई बिसात नही थी , और दाल से तुलना करना मुर्गी का अपमान था । लेकिन अब ज़माना बदल चुका है जनाब ! अब दाल और मुर्गी की तुलना के पहले ज़रा सावधानी बरतें , क्योंकि ये दाल का अपमान होगा। जी हां, महंगाई के इस दौर में दाल ने अपनी हैसियत में खासा इजाफा कर लिया है और इसकी पीली रंगत ने सोने के तेवर अख्तियार कर लिए हैं । वैसे आम आदमी के लिए ये कोई अच्छी ख़बर तो नही है बल्कि इससे मन ही दुखता है क्योंकि अब तो दाल रोटी खा कर प्रभु के गुन गाना भी आसान नही रहा ।दाल ने कीमत के अब तक के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और बेचारा गरीब आदमी अपनी टूटी कमर और फूटी किस्मत लिए बस यही सोच रहा है कि क्या अब सचमुच दाल रोटी की जगह मुर्ग बिरियानी खानी होगी ? बेचारे ने अपने और अपने बच्चों के लिए इतनी अच्छी दुआ तो कभी ख्वाब में भी नही मांगी थी ..... !

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

(3) ये कैसा सच ... !

आजकल स्टार प्लस पर कई लोग सच का सामना कर रहे हैं और रूपये जीत रहे हैं । ये बात दूसरी है कि उनका सच सुनने वालों का सर शर्मिंदगी से झुका जा रहा है । जिंदगी में गलतियां शायद हर किसी से होती होगी मगर कभी-कभी बीती बातो को भुला कर अपने आज में जीना ज्यादा सुकून देता है । ख़ुद को भी और दूसरों को भी । फिर भला ऐसी बातों की बेशर्म नुमाइश का क्या मतलब ? और मज़े की बात ये कि अगर सच bolne wala बेचारा नौ सच के बाद agla झूठ बोल दे to pahle कि jeeti sari रकम भी डूब jati है । यानि maya मिली न ram । सच बोल कर phajihat हुई , रूपये भी गए । कितना achchha होता कि ऐसे programs में आम आदमी को निशाना बनने की bajaay politicians को बुलाया jata और उनके सच की पोल kholi jati । kuchha to bhalaa होता लोकतंत्र का ।

pratima sinha

सोमवार, 27 जुलाई 2009

My second day on blog...

kabhi-kabhi mehsoos hota hai jaise zindagi bhagati hi chali ja rahi hai.Band Mutthi se phisalti ret ki tarah... pichhe mud kar dekho to lagta hai jaise kal ki hi baat ho. Jo kuchha beet chuka hai, wo sab kuchha yahi kahi thahar gaya sa lagta hai. lekin..., akhir sach to yahi hai, ki, waqt har pal guzar raha hai aur isi sach ke sath har pal ko jeena hi samjhdaari hai. kal nag-panchmi thi, aj Sawan maah ka third monday hai. shukra hai bhagwan ka, ki mere shahar mei abhi bhi maati se jude in teej-tyohar ki khushboo baki hai, warna bade kahe jane wale (?) shaharo mei to din-raat ke siwa bhahut kuccha pata hi nahi chalta.Jo bhi ho sawan ke pure maheene mei baba vishwanath ki nagari KASHI ki chhata hi nirali hoti hai aur iis baat ko wahi samajh sakta hai, jisne sawaan mei kashi ko karib se dekha ho.

see you all again !

शनिवार, 25 जुलाई 2009

My First Day of writing AKASH...

Mera Akash...
kitna sundar..., manmohak..., yaha se waha tak sirf aur sirf mera... !
I still can't believe that I have created my own blog finally and now I'm able to express my feelings & emotions with the whole world. I must be thankful to internet.
Kitna Kuch hai mere paas, kahne ko, batane ko,
Dhire-Dhire batoungi & I hope aap sabko bhi mera akash mei mere saath parwaz Bharna Achchha Lagega.Saat Rang batungi aap sabke saath...
mera aaj ka din sachmuch bahut achchha raha... .
Good Day...
meet you again...