सोमवार, 2 अप्रैल 2012

एक पुरानी बात......




जाने क्यों आज रोने को जी चाह रहा है ,
जाने क्यों भरी चली जा रहीं हैं पलकें,सुधियों की भीड़ से ,
जाने क्यों हर बात आज जैसे छू रही है मन ,
क्या है जो....
घुमड़ रहा है भीतर,
क्या है जो....
छूट रहा है बाहर ,
न जाने किसकी अनुपस्थिति ने पोंछ डाले हैं 
आसमान के सारे चटकीले रंग,
ये किसके न होने से 
सादी - वीरान सी हो गयी है हर दिशा,
ये किसका चेहरा बन कर धुंआ
छाया चला जा रहा है आँखों के आगे......? 
ये कौन है 
जिसका न होना............
 बाकी हर किसी के होने पर भारी पड़ गया है...? 


15 टिप्‍पणियां:

S.N SHUKLA ने कहा…

बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

कृपया मेरे ब्लॉग "meri kavitayen"पर भी पधारने का कष्ट करें, आभारी होऊंगा.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

उस कौन को जानने की उत्कंठा .... अच्छी प्रस्तुति

pratima sinha ने कहा…

एस. एन. शुक्ला जी ... हृदय से आभार उत्साहवर्धन के लिए...
संगीता जी ...उसी कौन की तलाश ही तो ज़िंदगी बन चुकी है...वैसे आपकी प्रतिक्रिया पाना एक बेहद सुखद अनुभव है...यूं ही स्नेह बनाये रखियेगा...!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Anayaas hi hota hai koi Jo udaasi faila jaata hai aur sabke hone ka ehsaas Bhi feeka ho jaata hai ...

M VERMA ने कहा…

ये कौन है
जिसका न होना............
बाकी हर किसी के होने पर भारी पड़ गया है...?
यकीनन कोई तो होगा
सुन्दर रचना

M VERMA ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
mridula pradhan ने कहा…

जिसका न होना............
बाकी हर किसी के होने पर भारी पड़ गया है...? behad bhawpoorn.

pratima sinha ने कहा…

aap sabhi mitron ka hriday se shukriya...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 30-08 -2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में ....देख रहा था व्यग्र प्रवाह .

Anupama Tripathi ने कहा…

hridaysparshi abhivyakti ....hai Pratibha ji...
shubhkamnayen ...!!

Anupama Tripathi ने कहा…

maaf kiijiyegaa Pratima ji ,aapki pratibha itanii achchhi lagi ki naam galati se Pratibha likh diya ..

कुश्वंश ने कहा…

खूबसूरत रचना

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया


सादर

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

bahut kuch kahti hai aapki rachna .........sundar bhav

Anand Dwivedi ने कहा…

आह.......
ये कौन है
जिसका न होना............
बाकी हर किसी के होने पर भारी पड़ गया है.


कविता को ऐसे ही समाप्त करना चाहिए कि या तो आह निकले मुह से या वाह
बधाई हो प्रतिमा जी !