नर्म ,श्वेत ,सपनीले बादलों तक जाता हुआ
एक मखमली रास्ता ... ,
और उस रास्ते के पार ,
एक छोटा , मगर बेहद प्यारा संसार ,
वो संसार ,जो 'हमारा' है... ।
जिसमें और कोई नहीं
मेरे और तुम्हारे सिवा ...,
और उस सपनीले संसार को
लम्हा भर के लिए
सजा लेती हूं
सारे रंग , सारी खुशबुओं से ... ।
और उस पल लगता है
जैसे
तुम मुझे बाहों में समेटे
आसमान के सादे कैनवास पर
जिंदगी की बेहद हसीन कविता लिख रहे हो ...
और
मैं तुम्हारे काँधे पर सिर रख कर
उन बादलों के पार
चमकते - झिलमिलाते
सितारे गिन रही हूं ... ।
प्रतिमा !!!!!!!










सम्पूर्ण विश्व को अपनी मोहन वीणा के सुरों से मोहने वाले महान कलाकार पद्मश्री पंडित विश्व मोहन भट्ट जी को कौन नहीं जानता । अपने काम के सिलसिले में यूं तो मुझे अक्सर ही बड़े लोगों और गुरुजन का सानिध्य पाने का सुअवसर मिलता रहता है लेकिन पिछले दिनों जब पंडित वि० मो० भट्ट जी से मिलने का सुयोग बना तो पहला विचार मन में यही आया कि ये अनुभव आपसे भी बंटाना है । आख़िर मेरे स्वप्नाकाश में मेरे सहचर अब आप भी तो हैं । पंडित जी जैसे सरल ,स्वर्ण हृदय , स्नेही , मृदुभाषी ,आत्मीय अंतर्राष्ट्रीय महान कलाकार से वो बहुत ही सहज और अन्तरंग मुलाक़ात मेरे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है और ये कुछ चित्र उन्हीं यादगार पलों के स्मृति - अंश हैं ।